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“जीवन प्रबंधन का विज्ञान गीताज्ञान” से बच्चों की चेतना का विकास

गीता के श्लोकों से उर्जान्वित हुआ पी एस एन इंग्लिश स्कूल

वाराणसी। उत्तम संस्कार, नैतिक मूल्यों एवं चरित्र निर्माण का पवित्र भाव जागृत करने तथा जीवन प्रबंधन के शाश्वत संदेश को विद्यार्थियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से नगवा स्थित पी एस एन इंग्लिश स्कूल में महामना मालवीय मिशन (बीएचयू) एवं महामना संस्कार पुस्तकालय वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में गीता ज्ञान प्रतियोगिता एवं गीता श्लोक गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें कक्षा तीन से कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं गीता ज्ञान प्रतियोगिता के मुख्य संयोजक श्री अखिलेश कुमार राय द्वारा रचित वंदना गीत “जय जय महामना भारत रतन, गीता के ज्ञान से करें वंदन” से हुआ जिसमें सहभाग करते हुए झूम उठे बच्चे। कार्यक्रम का संचालन अध्यापिका सुनीता त्रिपाठी ने किया। गीता श्लोक गायन प्रतियोगिता में बच्चों की श्रद्धा एवं उत्साह को देखकर मुख्य अतिथि सहित विद्यालय प्रबंधक, प्राचार्या तथा उपस्थित सभी शिक्षकगण ने मुक्त कंठ से प्रशंसा किया।

इस अवसर पर प्राचार्या श्रीमती किरण सिंह ने विद्यार्थियों की बेहद उत्साहवर्धक सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन से संपूर्ण विद्यालय प्रांगण में सकारात्मकता उर्जा महशुस होती है और नई पीढ़ी के अंदर अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक बुनियाद की अनुभूति होती है जो उनके नैतिक विकास, चरित्र निर्माण एवं संस्कार-सिंचन हेतु बेहद महत्वपूर्ण है। इस डिजीटल युग में बच्चों के उपर बढ़ते मानसिक दबाव, भटकाव, एवं नैतिक दुविधा को देखते हुए गीता क्विज प्रतियोगिता तथा श्लोक गायन प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को जीवन प्रबंधन का विज्ञान गीताज्ञान से जोड़ने का प्रयास उनके सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगा।

इस कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए विद्यालय प्रबंधक श्री कौश्तुभ पाण्डे ने कहा कि, ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, नैतिकता एवं सांस्कृतिक चेतना विकसित करने की प्रेरणा देते हैं जो अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य अतिथि श्री अखिलेश कुमार राय ने अपने संबोधन में गीताज्ञान के व्यावहारिक पक्ष को प्रस्तुत करते हुए इसे ‘जीवन प्रबंधन का विज्ञान’ कहा, जो बच्चों को बहुत अच्छा लगा। उन्होंने बताया कि जीवन में सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा, मानवीय मूल्यों के प्रति जागृति, राष्ट्र सर्वोपरि का भाव और प्रतिकूलताओं के बीच भी मानसिक संतुलन बनाए रखते हुए विवेक पूर्ण निर्णय लेने की क्षमता हमें गीताज्ञान से मिलता है जो नई पीढ़ी तक पहुंचाना एवं एक भारत श्रेष्ठ भारत विकसित भारत का संकल्प सिद्ध करने के लिए सुयोग्य नागरिक तैयार करना ही इस अभियान का उद्देश्य है| इसी विचार को केंद्र में रखते हुए इस वर्ष प्रतियोगिता की थीम “जीवन प्रबंधन का विज्ञान गीताज्ञान” रखी गई है।

महान शिक्षाविद् एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक भारतरत्न महामना मालवीय जी की दूरदृष्टी का उल्लेख करते हुए श्री राय ने कहा कि गीता को उत्तम मार्गदर्शिका मानते हुए वे विद्यार्थियों को गीता स्वाध्याय के लिए सदैव प्रेरित करते रहे और बीएचयू में सभी संकाय के विद्यार्थियों के लिए गीता स्वाध्याय को अनिवार्य रूप से लागु किए थे। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर गीता के ज्ञान को अधिकाधिक विद्यार्थियों तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बार वाराणसी के 100 विद्यालयों में गीता ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी जिसके अंतर्गत अब तक 85 विद्यालय पंजीकरण करा चुके हैं और गाँधी जयंती से इस कार्यक्रम का शुभारंभ भी हो गया है।
श्री राय ने विद्यालय प्रबंधन, प्राचार्या, तथा समन्वयिका सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं के सहयोग की प्रशंसा करते हुए विद्यालय परिवार और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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