अयोध्या राम पीठ के केन्द्रीय व्यवस्था प्रमुख बने डा० राजीव

अयोध्या राम पीठ के केन्द्रीय व्यवस्था प्रमुख बने डा० राजीव


वाराणसी, 06 अगस्त। अयोध्या के प्राचीनतम साकेत भूषण श्रीराम पीठ विद्याकुण्ड के लश्करी सम्प्रदाय के गद्याचार्य महंत शम्भू देवाचार्य ने जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशाल भारत संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डा० राजीव कुमार श्रीवास्तव को श्रीराम पीठ का केन्द्रीय व्यवस्था प्रमुख मनोनीत किया है। डा० राजीव कुमार श्रीवास्तव मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय सेवा प्रमुख, अनाज बैंक के संस्थापक चेयरमैन, पातालपुरी मठ के ट्रस्टी एवं इतिहासकार हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार के साथ जातीय भेदभाव, छूआछूत जैसे अभिशाप से भारतीय समाज को मुक्त कराने के लिये काम कर रहे हैं। डा० राजीव श्रीवास्तव ने मुस्लिम महिलाओं की श्रीराम आरती का आयोजन कर जहां साम्प्रदायिक एकता को आगे बढ़ाया वहीं मुस्लिम समाज को यह बताया कि उनके पूर्वज भगवान श्रीराम ही हैं। डा० राजीव ने लमही के इन्द्रेश नगर में सुभाष मंदिर का निर्माण कराया, जहां पहली दलित महिला पुजारी की नियुक्ति करायी। दलित पुजारी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाकर दलित वर्ग में से पुजारी बनाने की योजना पर कार्यरत हैं, ताकि व्यवहारिक रूप से छूआछूत की समाप्ति हो सके। अब अयोध्या के रामपीठ के व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे।

चार विशिष्ट हस्ती रामचरित का विश्व मे करेंगे प्रचार


महंत शम्भू देवाचार्य ने अयोध्या के महात्म्य से विश्वभर को परिचित कराने अयोध्या के अन्य मंदिरों के पुननिर्माण, राम चरित्र को विश्वभर में फैलाने के उद्देश्य से श्रीराम जन्मभूमि पूजनोत्सव के दिन 5 अगस्त को चार विशिष्ट हस्तियों को मनोनीत किया है। जिसमें काशी से डा० राजीव कुमार श्रीवास्तव के अतिरिक्त गोपी राधा इंटर कॉलेज के प्रबन्धक मनोज कुमार शाह को केन्द्रीय विदेश सम्पर्क प्रमुख मनोनीत किया। नागपुर से संघ विचारक एवं पत्रकार विराग पाचपोर को केन्द्रीय प्रचार प्रमुख एवं नई दिल्ली के भारत रावत को सह प्रचार प्रमुख मनोनीत किया है। लश्करी सम्प्रदाय का यह मठ अत्यन्त प्राचीन एवं ऐतिहासिक है। इसी मठ में श्रीराम, भरत, लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न की प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा हुयी थी। साकेत भूषण श्रीराम पीठ में भगवान श्रीराम की हजारों साल पुरानी मूर्ति पुरातात्विक दृष्टि से अत्यन्त महत्व की है। अयोध्या में कई मन्दिर हजारों साल पुराने हैं जो जीर्ण शीर्ण की अवस्था में हैं। भगवान श्रीराम के सभी प्रतीकों को संरक्षित करने की योजना पर राम पीठ काम कर रहा है। साकेत भूषण श्रीराम पीठ, विद्याकुण्ड का भी पुनरूद्धार करने की योजना है। इसके लिये वैश्विक स्तर पर सनातनी संस्कृति एवं श्रीराम में विश्वास रखने वालों को अयोध्या से जोड़ा जायेगा।

रिपोर्ट : काशीनाथ शुक्ल