नारायण की शरण मे है महामारी से बचने का एकमात्र रास्ता

नारायण की शरण मे है महामारी से बचने का एकमात्र रास्ता- जगद्गुरु सम्पतकुमाराचार्य

वाराणसी। पूरा देश इस वक्त कोरोना महामारी के दंश को झेल रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में दोबारा लॉकडाउन किया गया है। इस लॉक डाउन की वजह से चारों तरफ परेशानियों व दुश्वारियों ने लोगों का जीना दूबर कर दिया है। ऐसे में कोरोना महामारी से निपटने के लिए एकमात्र रास्ता धर्म का रास्ता है। पूर्णतया स्वस्थ रहने और दीर्घायु प्राप्त करने के लिए वेदों और पुराणों में वर्णित शास्त्रीय विधि से पूजन-हवन ही एकमात्र रास्ता है। श्री श्री 1008 जगतगुरु संपतकुमाराचार्य महाराज ने शास्त्रीय विधि को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया है। उन्होंने बताया है कि केतु धनु राशि पर पूर्व से ही वक्री होकर विराजमान थे जो 30 जून से गुरु का मकर राशि से वक्री होकर धनु राशि में प्रवेश कर के केतु के साथ युति बना लेने से कोरोनावायरस का दिनोंदिन बढ़ोतरी होते जा रहा है। यह स्थिति 29 सितंबर तक बनी रहेंगी। 29 सितंबर के बाद ही इस महामारी से मुक्ति का योग बनेगा। इसलिए समस्त जनमानस से अनुरोध है कि वह सभी सरकारी नियमों का पालन करें। अपनी सुरक्षा स्वयं करें। घर में रहे, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

जगद्गुरु ने बताया कि नारायण के नामों का जप कीर्तन करते रहें। घर में ही नारायण का ध्यान पूजन व हवन करें। निरंतर नारायण के भजन व चिंतन से ही इस महामारी पर विजय प्राप्त किया जा सकता है। इस समय जो भी नारायण का भक्ति करेगा उसे कोरोना या कोरोना जैसी कोई भी महामारी उसके पास प्रवेश नहीं कर सकती है। गुरुजनों ने पुराणों उपनिषदों और वेदों में जिस शास्त्रीय तरीके को हमें सिखाया है ऐसे महामारी काल में उन्हीं शास्त्रीय तरीके का पालन करके ऐसे महामारियोँ का जवाब दिया जा सकता है। हमारे वेदों को विदेशी भी मानने लगे हैं जिसका उदाहरण है अमेरिका के व्हाइट हाउस में ट्रम्प द्वारा वेदों का पाठ कराया जाना। इससे यह प्रमाणित हो गया है कि हमारा धर्म श्रेष्ठ है, इसका ना आदि है न अंत है। जो भी इन धर्मों का शास्त्रीय विधि पूर्वक पूर्ण रुप से पालन करेगा उसे ना कोई बीमारी ना कोई महामारी और ना कोई बाधा घेर सकती है।

रिपोर्ट : काशीनाथ शुक्ल