महिलाये बना रही हर उम्र के लोगो के लिए डिजानर मास्क

रूरल वीमेन टेक्नोलॉजी पार्क की महिलाये बना रही है हर उम्र के लोगो के लिए डिजानर मास्क

वाराणसी । आज संपूर्ण विश्व और देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है तो इन कठिन परिस्थितियों में प्रत्येक देशवासी बहुत ही साहस और धैर्यता का परिचय देते हुए अपना- अपना योगदान दे रहा है। इतिहास साक्षी है कि कोई भी महामारी जब आती है तो वह हमारी सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक व्यवस्था के साथ साथ  रहन-सहन, जीवन जीने के तरीके और कार्य व्यवहार में अकल्पनीय बदलाव भी लाती है। अब कोरोना के प्रकोप से भी लोगो के जीवन जीने का सलीका भी बदलेगा। ऐसे में खुद को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिये विशेषकर महिलाओ व बेटियों के लिए सीड डिवीजन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से संचालित रूरल वीमेन टेक्नोलॉजी पार्क व आई0सी0टी0 आधारित जरी जरदोजी केंद्र, वाराणसी की प्रशिक्षित लड़किया विगत 2 सप्ताह से 2000 से अधिक मॉस्क का निर्माण की हैं । जिसको संस्थान के माध्यम से करके आस-पास के जरूरतमंद लोगों, बैंक के सामने, राशन की दुकानों तथा अति निर्धन ग्रामीणों को वितरित किया जा चुका है और राष्ट्रहित में अपना विशेष योगदान दे रही हैं।

बच्चों के लिए कार्टून डिजाइनर मास्क

अब यही महिलाये मानव मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए  मॉस्क का स्वैच्छिक प्रचलन बढ़ाने के लिये इसका स्वरूप आकर्षक बना रही है। जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षा मानकों का परिपालन करते हुए बच्चो के लिये कार्टून करेक्टर वाले मॉस्क, लड़कियों व महिलाओ के लिये उनकी रुचि को देखते हुए डिजाइनर मॉस्क तथा बुजुर्गों के लिये उनके उम्र के हिसाब से आराम दायक मॉस्क संस्थान की डिजानर व हुनर-ए-बनारस की निदेशिका सरिता वर्मा के नेतृत्व में डिजानर रजनी पांडेय, पूजा सिंह व साधना सिंह के द्वारा डिजाइनर मॉस्क तैयार किया जा रहा है।

गमछा व स्टॉल भी कर सकते हैं इस्तेमाल

साईं इंस्टिट्यूट के निदेशक अजय सिंह ने टेलीफोनिक वार्ता में बताया कि इसको बनाने में अधिक खर्च न हो यह देखना जरूरी होगा। मॉस्क को लगाकर बोलने में कठिनाई महसूस न हो इसके लिये विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अजय सिंह ने आगे बताया कि भारतीय ग्रामीण परम्परा व प्रधानमंत्री जी के आहवाहन पर गमछा एवं लड़कियो द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाला स्टॉल को तीन परत से चेहरे को ढकना सबसे अच्छा होगा। इसके साथ ही प्रति दिन 6 से 8 घण्टे उपयोग के बाद इन्हें सेनिटाइज किया जाना अथवा साबुन से धूल करके धूप में तीन चार घण्टे सुखाया जाना जरूरी होगा।

 

इसी प्रकार घर के बाहर यूज किये गए मॉस्क को रखने की नई व्यवस्था बनाना आवश्यक होगा। इसके लिये संस्थान न सिर्फ डिजाइनर मॉस्क बना रहा है बल्कि इसके यूज करने के तौर तरीकों के बारे में सेंटर की प्रशिक्षित महिलाओ के माध्यम से ऑनलाइन, व्हाट्स एप्प के माध्यम से लोगो को जागरूक भी कर रहा है। मेरा यह विश्वास है कि हम सभी देशवासी एकजुट होकर माननीय प्रधानमन्त्री जी के कथनानुसार  लॉक डाउन, सोशल डिस्टेंसिंग एवं मंत्रालय की ओर से दिए गए निर्देशों पालन करते हुए कोरोना जैसे वैश्विक महामारी को जड़ से खत्म कर देंगे।

रिपोर्ट : के एन शुक्ल