प्रशासन कि लापरवाही कही पड़ ना जाये भारी, सुबह 06 से 10 बजे तक लगने लगा हाट-बाजार, दुकानों पर लगने लगी भीड़, सोशल डिस्टेंस के आदेशों की उड़ रही धज्जियां, क्या पेटलावद को ऐसे बचाएगा प्रशासान –

प्रशासन कि लापरवाही कही पड़ ना जाये भारी, सुबह 06 से 10 बजे तक लगने लगा हाट-बाजार, दुकानों पर लगने लगी भीड़, सोशल डिस्टेंस के आदेशों की उड़ रही धज्जियां, क्या पेटलावद को ऐसे बचाएगा प्रशासन ?

News@- kr shan thakur –
पेटलावद। कोविड-19 – देश मे फैली इस महामारी से निपटने के लिए सिर्फ एक मात्र जरिया है ”सोशल डिस्टेंस” इस महामारी को लेकर कोई इलाज संभव नही हो पाया है। महाशक्तिशाली कहे जाने वाले देशो ने भी इस महामारी के आगे गुटने टेक दिए है और हिंदुस्तान भी मानो बारूद के ढेर पर है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए खुद प्रधानमंत्री 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा कर चुके है। पीएम द्वारा घोषित लॉक डाउन का एक ही उद्देश्य है कोरोना वायरस की चैन को तोड़ना ओर वह तभी सम्भव है जब सोशल डिस्टेंस में रहकर आम नागरिकों को अपनी जवाबदेही समझना होगी, साथ ही प्रशासन को भी इस ओर हर संभव प्रयास करते है सख्त होना पड़ेगा क्योकि बिना सोशल डिस्टेंस के इस बीमारी से निपटना नामुमकिन है।

सोशल डिस्टेंस तो नही यंहा आदेशो की उड़ रही धज्जिया..
सोशल डिस्टेंस के आदेश के बावजूद भी पेटलावद सहित आसपास क्षेत्र में नागरिकों एवं प्रशासान की लापरवाही से भारी भीड़ होते देखी जा रही है। आपको बता दे की जिला कलेक्टर के आदेशानुसार सुबह 06 बजे से लेकर 10 बजे तक जरूरी सामान जैसे सब्जी,दूध, फल, दवाइयां खरीदने हेतु समय दिया गया है, किन्तु इस समय बाजारों में भारी भीड़ दिखाई दे रही है, सुबह 6 से 10 बजे तक मानो ऐसा लगता है जैसे हाट बाजार शुरू हो चुका है। किंतु प्रशासन भी इस समय के बीच सोशल डिस्टेंस के महत्व को भूल चुका है। ओर हाथ पे हाथ धरे नजारा देख रहा है। किन्तु प्रशासन को ध्यान रहे की संक्रमण को फैलने के लिए किसी समय की आवश्यकता नही है। खरीदी के नाम पर जो भीड़ को छूट देते हुए सोशल डिस्टेंस की धज्जिया उड़ाई जा रही है वो एक बड़े खतरे को निमंत्रण देने जैसा है।

लापरवाही… 
सोशल डिस्टेंस के मद्देनजर सभी दुकानो पर एक एक मीटर के बॉक्स बनाये जाना थे जिससे वहां भीड़ ना लग सके और सभी सुरक्षित रहे किन्तु नगर में कुछ ही स्थानों पर यह व्यवस्था देखने को मिल रही है। बाकी दुकानों पर भारी भीड़ आसानी से देखी जा सकती है, ऐसे में भीड़ में कई लोग बिना मास्क के भी दिखाई पड़ते है, ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है किस तरह लापरवाही का आलम जारी है।

प्रशासन को तो अपनी जिम्मेदारी समझकर इस ओर कार्य करना ही चाहिए किन्तु आम नागरिकों को भी अपनी समझ से काम लेते हुए इस महामारी की जंग में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना होगा और सरकारी आदेशो को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाना भी होगा क्योंकि थोड़ी भी लापरवाही हर किसी के लिए भारी पड़ सकती है, जरूरत है अब भी सम्भलने की है।