आधुनिकता के जमाने में भी पत्थर की खरड़ ओर घट्टी की ग्रामीण क्षेत्रो में भारी पूछपरख –

आधुनिकता के जमाने में भी पत्थर की खरड़ ओर घट्टी की ग्रामीण क्षेत्रो में भारी पूछपरख –

News@- राजेश राठौड़ –
रायपुरिया (झाबुआ) – आज भी ग्रामीण अंचलों में पत्थरों से बनी हुई खरड़ व घड्डी का इस्तेमाल होता है रायपुरिया के झाबुआ चौराहे के समीप पुल के पास लाबरिया निवासी तूफान भाटी अपनी कला के माध्यम से पत्थरों को तराश कर खरड व घट्टी बना रहे हैं भले ही आज के समय आधुनिकता का है लेकिन ग्रामीण अंचलों में इन चीजों की पूछ परख वैसी की वैसी बनी हुई है तूफान भाई बताते हैं कि हमारे पूर्वजो ने यह धंधा बताकर हमें कला सिखाई थी उसका आज भी हम निर्वाह कर रहे हैं वह कहते हैं कि मिक्सर में जो पिसाई होती है उसका स्वाद नहीं रहता है जो मिर्ची खरड़ में पीसकर कर सब्जी में डालते उसका स्वाद अलग ही रहता है पत्थरों को इस तरह से अपनी कला से बनावट कर देते हैं जैसे कोई मशीन से बनाई हो करीबन 25 वर्षों से रायपुरिया क्षेत्र में आ रहे हैं और इन चीजों को बनाकर बेच रहे हैं एक खरड़ लगभग ₹250 मैं बेचते हैं लाबरिया से करीबन 300 पत्थर लेकर आए हैं देसी चीजों का अलग ही महत्व रहता है कहते हैं कि दिन भर में 3 से 4 खरड़ अपने हाथों से बनाते हैं उसके बाद ग्रामीण अंचलों में बेचने जाते हैं । उनको देख कर लगता है कि कला किसी की मोहताज नही होती।