देखरेख के अभाव में उपेक्षा का शिकार हो रहा स्वतंत्रता संग्राम सेनानीयो का स्मारक, शाम ढलते ही नशेड़ीयो का लग जाता है जमावड़ा, क्या गणतंत्र दिवस पर मिलेगा सम्मान –

देखरेख के अभाव में उपेक्षा का शिकार हो रहा स्वतंत्रता संग्राम सेनानीयो का स्मारक, शाम ढलते ही नशेड़ीयो का लग जाता है जमावड़ा, क्या गणतंत्र दिवस पर मिलेगा सम्मान –

News@- सुनील खोड़े –
पेटलावद (झाबुआ) – शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खेल मैदान में बना स्वतंत्रता संग्राम सेनानीयों का नाम अंकित स्मारक देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। इस स्मारक चिन्ह पर आदिवासियों के मसीहा मामा बालेश्वर दयाल और भीमा शंकर नारायणजी शुक्ला जिनका देश की आजादी के समय प्रमुख लोगों में नाम शामील हैं। इन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था ऐसे महान व्यक्तियों का नाम लिखा स्मारक चिन्ह उपेक्षा का शिकार होता नजर आ रहा है। जिससे आमजन और इनसे जुड़े लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। आखिरकार जिम्मेदार अधिकारी क्यों अनदेखा कर रहे हैं यह समझ से परे है।
दरअसल, वर्ष १९७५ में भारत सरकार ने देश की आजादी को २५ वर्ष हो जाने पर इसका निर्माण करवाया था। इसे देखकर लगता हैं जबसे यह बना हैं इस पर रंग के अलावा कुछ नही किया गया। दिन में बच्चे क्रिकेट का स्टम्प समझकर इस पर खेलते हैं तो रात के समय नशेडियों का अड्डा यहां रहता हैं। रोज सुबह शराब की बोलते यहां देखी जा सकती हैं। जबसे यह बना हैं तब से शायद ही कोई २६ जनवरी और १५ अगस्त होगी जिस पर प्रशासन या किसी राजनीतिक दल द्वारा यहां पुष्पांजली या इसे याद कर गार्ड ऑफ आनर दिया हो। आजादी मिल गई और आजादी दिलाने वालों को ही यहां के नुमांदे भुल गए।
इस तहर से इस शीललेख को अनदेखा करना जिम्मेदारों के लिए कतई ठीक नहीं है। जबकि इस पर स्वतंत्रता सेनानीयों के साथ देश का प्रतिक चिन्ह, राष्ट्रीय पक्षी, पशु व फूल भी अंकित हैं। इस क्या लिखा अब लगातार हो रहे कलर के कारण वह भी ठीक से दिखाई नहीं पड़ रहे हैं और इस स्मारक के आसपास बना ओटला टूट फूट चुका है। आखिरकार कब तक हमारे महान व्यक्तियों का जिन्होंने अपना योगदान दिया है उपेक्षा का शिकार होते रहेंगे। हर बार की तरह आनन-फानन में जिस तरह से इस स्मारक चिन्ह पर 26 जनवरी को देखते हुए कुछ घंटों पहले ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक पर पेंट किया गया। जिससे शीलालेख पर अंकित नाम पूर्ण रूप से मिट गए हैं जो दिखाई नहीं पड़ रहे हैं।