ग्रामीणों क्षेत्रो फीका हुआ त्योहारों का उत्साह, धीरे-धीरे लोग परम्पराओ से हो रहे दूर –

ग्रामीणों क्षेत्रो फीका हुआ त्योहारों का उत्साह, धीरे-धीरे लोग परम्पराओ से हो रहे दूर –

News@- राजेश राठौड़ –
रायपुरिया (झाबुआ) – ग्रामीण अंचलों में त्यौहार हुए फिके उसका कारण तो समझ में नहीं आ रहा है लेकिन देखा जाए तो काम का इतना दबाव या फिर पैसे की इतनी लालसा या फिर आने वाले पीढ़ी को त्यौहार का पता ही नहीं रहता तो बच्चों को कैसे बताएं की किस तरह त्यौहार मनाया जाता है मकर संक्रांति पर्व ग्रामीण अंचलों में फीका रहा जबकि पुराने बुजुर्ग कहते हैं कि हमारे समय तो मकर संक्रांति का पर्व इतनी जोर शोर से मनाते थे कि सुबह से ही गुल्ली डंडा खेलने के लिए निकल जाते थे उसके बाद महिलाएं अपने घरों में सुबह जल्दी उठकर गाय व कुर्तों के लिए गर्म रोटियां बना कर अपने हाथों से खिलाती थी लेकिन अब ऐसा कुछ जगहों पर होता है बाकी सब फॉर्मेलिटी करते हैं पहले दान पुन्य करने के लिए ब्राह्मणों को पहले से ही बोल दिया जाता था कि आप हमारे घर पधार ना कहीं ऐसा तो नहीं कि अब आज के युवा मोह माया मैं व्यस्त हो गया है पहले के जमाने में रायपुरिया के हाट बाजार के मैदान पर गायों के लिए घास डाली जाती थी लेकिन अब वह भी धीरे-धीरे गायब होती जा रही है त्यौहार ग्रामीण अंचलों में नहीं के बराबर मनाए जा रहे हैं पहले तिल पपड़ी एक दूसरे को खिलाते थे लेकिन अब वह भी गायब होते दिखाई दे।