सिचाई विभाग की लापरवाही खेतों मै पहुंच सकता हैं खतरनाक जहर –

सिचाई विभाग की लापरवाही खेतों मै पहुंच सकता हैं खतरनाक जहर –

 

News@- अनिल मुथा –
झाबुआ – क्षेत्र में किसानों के लिए वरदान साबित हो रही माही सिंचाई परियोजना में इस वर्ष सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते किसानों के लिए एक नई तरह की परेशानी खड़ी हो गई है बताया जाता है कि माही परियोजना की बाई तट मुख्य नहर जिससे कि पेटलावद तहसील के सैकड़ों बीघा क्षेत्रफल में पानी पहुंचता है उसमें विभाग की लापरवाही के कारण जहरीला पानी पहुंचने की आशंका बन गई है कारण यह है कि बरसात के मौसम में मुख्य नहर तथा उससे जुड़ी हुई सहायक नेहरों में काफी मात्रा में घास तथा अन्य उप खरपतवार की हाथों से खरपतवार उगाता है सिंचाई विभाग ने , खरपतवार को हाथों से हटवाने के बजाय विभाग ने नहर के दोनों अंदरूनी किनारों पर भयानक वीडियो साइट यानी खरपतवार नाशक का छिड़काव करवा दिया इस रसायन के प्रभाव से घास पात व अन्य खत्म खरपतवार सूख गए इस तरह नाहर की आधी अधूरी सफाई तो हो गई परंतु नहर में जो जहर छिड़का गया अब वह पानी में घोलकर हजारों बीघा खेतों में पहुंच जाएगा तथा फसल और जमीन को जहरीला बना देगा उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में चारा मार दवा यानी खरपतवार नाशक के कई दुष्प्रभाव पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर देखे जा रहे हैं पूरे देश भर तथा विदेशों में इस पर कई शोध जारी है चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई जानकारों के अनुसार खरपतवार नाशक मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है इससे कैंसर होने की स्थिति बन जाती है सिंचाई विभाग की लोभ लालच की नीति तथा लापरवाही के कारण हजारों बीघा रब्बे में कैंसर कारक जहरीला रसायन पहुंचने की स्थिति बन गई है कई किसान जो जैविक खेती कर रहे हैं किए गए इस कार्य के संबंध में जब विभाग के अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की गई तो उन्होंने लीपापोती करते हुए बताया कि यह कार्य जल उपभोक्ता समितियों के द्वारा किया गया है क्योंकि नेहरू का प्रबंधन उन्हीं के हाथों में होता है हमने प्रायोगिक तौर पर केवल झाबुआ जिले की लहरों में कुछ मात्रा में खरपतवार नाशक का छिड़काव करवाया है लेकिन यह किस ब्रांड का है और कितनी मात्रा में चढ़ गया है इस बारे में अधिकारियों ने कुछ नहीं बताया आने वाले दिनों में यदि इस कैंसर पैदा करने वाले हरवी साइट का असर क्षेत्र के आम किसान परिवारों तथा उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर दिखे इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा अब तक अरबी साइड के प्रभावों पर जो अध्ययन किए गए हैं उसने पाया गया है किया पर्यावरण जमीन की उर्वरा क्षमता तथा मानव स्वास्थ्य सभी के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है अब यह सवाल उठता है कि मानव स्वास्थ्य को उत्पन्न होने वाले खतरे की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग लेगा