घर का भेदी लंका ढाए, अधिकारियों की चमचागिरी करने वाले खबर नवीसो से सावधान –

घर का भेदी लंका ढाए, अधिकारियों की चमचागिरी करने वाले खबर नवीसो से सावधान –

पेटलावद (झाबुआ) – छल बल और बाहुबल के आगे तो अच्छे-अच्छे खा की भी बोलती बंद हो जाती हैं, ऐसा ही वाक्य बोडायता पंचायत के अंतर्गत आने वाला गांव नाहरपुरा के हितग्राही के साथ हुआ भले ही हित ग्राही के खाते में राशि डालने की बात पंचायत सचिव और जनपद समन्वयक बाबूलाल परमार कर रहे हो परंतु जब सोशल मीडिया के जरिए जो अधूरे शौचालय की तस्वीर दिखाई गई थी उसकी स्थिति वास्तविक रूप से अधूरी थी परंतु एक कहावत है डर के आगे भूत भागे की तर्ज पर हितग्राही पर दबाव बनाया गया और डराया गया तब जाकर उसने हार मानकर अधिकारियों के अनुसार हां में हां मिलाकर कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

ठीक ऐसा ही षड्यंत्र बाबूलाल परमार और सचिव निनामा ने इस पूरे मामले को उठाने वाले सोशल मीडिया के पत्रकार गांव में रहकर अपने गांव की आवाज उठाना चाहता था जिसे दबाया गया। जबकि जो खबर अधूरे शौचालय निर्माण को लेकर चलाई गई थी उस शौचालय की स्थिति वास्तविक रूप से अधूरी ही थी ऐसी स्थिति में अधिकारियों को खबर चलना रास नहीं आया और उन्होंने न सिर्फ हितग्राही को सेट किया बल्कि सोशल मीडिया के नवेले पत्रकार को भी चुप करा दिया आखिरकार अधिकारियों की कार्यप्रणाली दबे कुचले शोषित लोगों के लिए एक तरह का जहर से कम नहीं यदि प्रशासनिक नुमाइंदे अपने कारनामों पर पर्दा डालने के लिए तमाम हथकंडे अपनाने से लेकर भयभीत करने तक नहीं चूक रहे हैं उच्च अधिकारियों को इस पूरे मामले में संज्ञान लेना चाहिए। क्योकि की पूरे मामले को देखे तो सबसे पहले एक खबर सोशल मीडिया पर आती है जिसमे अधूरा शोचालय निर्माण होने व हितग्राही के सामने आने की खबर दिखाई देती है, किन्तु अगले दिन खुद हितग्राही द्वारा अपने शोचालय के पूर्ण होने की बात कही जाती है, वही मामले को प्रकाश में लाने वाले सोशल मीडिया के पत्रकार को उसी दिन से डराने धमकाने का कार्य बाबुलाल व सचिव द्वारा किया जाता है, ओर डरा सहमा सोशल मीडिया का पत्रकार हमसे सम्पर्क करता है और अपने बयान को वीडियो में दर्ज करवा कर अपनी पीड़ा सुनता है किंतु फिर अचानक वही सोशल मीडिया का युवा पत्रकार अपनी बात से हटकर माफीनामा लिख कर देता है। जबकि एक दिन पूर्व युवक अपने होशोहवास में बाबुलाल व सचिव की दबंगई का बखान करता है। पूरा मामला देखा जाए तो योजनाबद्ध तरीके से दिखाई देता है। गांव में जाकर पूरे मामले की जांच करने वाला भी बाबूलाल ही है जबकी खुद बाबुलाल आरोपो के घेरे में। ऐसे में की गई जांच को भी सही नही माना जा सकता है। उच्च अधिकारियों को मामले में संज्ञान लेना चाहिए। क्योकि बाबुलाल व सचिव ने पूरे मामले को अपने पक्ष में कर वाहवाही लूटने हेतु खबरे छपवाने तक कदम बढ़ा लिए है।

वही कुछ ऐसे भी चाटुखोर पत्रकार है जिन्हें पत्रकारिता का अक्षर ज्ञान भी नहीं है परंतु वे अधिकारियों की चमचागिरी करने में जरा भी चूक नहीं करते हैं पूरा दिन जनपद तहसील और शासकीय कार्यालयों के इर्द गिर्द घूमा करते हैं। 100-500 में बिकने वाले खबर नवीसो के कारण पत्रकार जो अपने मान मर्यादा को बचाए रखे हैं वह भी बदनामी का दंश झेल रहे हैं।

अगले अंक में पढ़े दस्तावेजी खबर…