तो क्या कमलेश तिवारी हत्याकांड की हो सकती है पुनरावृत्ति, अरुण पाठक को जान का खतरा

तो क्या कमलेश तिवारी हत्याकांड की हो सकती है पुनरावृत्ति, अरुण पाठक को जान का खतरा

वाराणसी! एटीएस ने मुख्य आरोपियों को 5 दिन में पकड़ लिया लेकिन इन 5 दिनों में कमलेश तिवारी हत्याकांड में कई अन्य रोचक घटनाक्रम हुए। इन घटनाक्रम में सबसे बड़ी बात उभरकर आई हिंदुत्व की। महाराष्ट्र में चुनाव और हिंदुत्व पीछे रहे ऐसा हो सकता है क्या और फिर कमलेश तिवारी की हत्या ने एकबार फिर हिंदुत्व व हिंदूवादी नेताओं को जैसे जगाकर रख दिया।

जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ सबका विकास की बात करते हैं और सबको साथ लेकर चलने का दावा करते हैं वहीं दूसरी ओर यूपी के मुखिया आदित्यनाथ योगी जो खुद हिंदुत्व के ब्रांड अम्बेसडर हैं, उन्ही के गढ़ में एक कट्टर हिंदूवादी नेता की हत्या उनके नाक के नीचे कर दी जाती है। इन सब घटनाक्रम के बीच शिवसेना के फायर ब्रांड नेता की छवि वाले अरुण पाठक ने सामने आकर बयान दे डाला। ये बयान उनका गुस्सा जाहिर करता है या राजनीति से प्रेरित था ये अरुण पाठक ही बता सकते हैं। लेकिन बयान से लगता है कि कहीं न कहीं कमलेश तिवारी की हत्या ने उनके मन मस्तिष्क को झकझोर कर रख दिया है। अरुण पाठक जानते जरूर होंगे कि उनके पास एक करोड़ नहीं है पर उन्होंने कमलेश तिवारी के हत्यारों की हत्या करने पर एक करोड़ का इनाम रखा। हालांकि उन्होंने अपने जारी किए वीडियो में ये भी कहा कि इनाम की राशि कम पड़ने पर वो हिंदुओं के आगे हाथ फैलाकर पूरा करेंगे।

कहते देर न लगी कि क्रिया की प्रतिक्रिया होनी ही थी। धमकियां आने लगी। अरुण पाठक को डर हो न हो परिवार को खतरा महसूस जरूर हुआ। खुद चुनाव प्रचार के दौरान महाराष्ट्र गए तो अभी लौटे नहीं हैं और न खुद के जान की परवाह है लेकिन पत्नी मनीषा को अपने पति और बच्चों की चिंता होने लगी है और उन्होंने शासन और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। हालांकि पत्नी द्वारा सुरक्षा मांगने पर भी अरुण पाठक भड़क उठे हैं क्योंकि उन्होंने अपने और अपने परिवार के सुरक्षा का दायित्व बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ और माता श्रृंगार गौरी को दिया है।

अब सवाल ये उठता है कि हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी के हत्या के बाद क्या माहौल बदलेगा ? क्या फिर से देश मे हिन्दू मुस्लिम संगठन आमने सामने होंगे ? शायद नहीं लेकिन क्रिया के बाद प्रतिक्रिया और फिर प्रतिक्रिया से अंतर जरूर पड़ेगा। कमलेश तिवारी के हत्यारे पकड़े जा चुके हैं आगे का काम कानून का है। लेकिन अगर ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती है तो सदियों से चली आ रही गंगा जमुनी तहजीब की परंपरा को जरूर धक्का लगेगा।

–के एन शुक्ल