कृत्रिम गर्भाधान केंद्र पड़ा तीन वर्ष से बंद, ग्रामीण परेशान

कृत्रिम गर्भाधान केंद्र पड़ा तीन वर्ष से बंद, ग्रामीण परेशान –

News@- चरणसिंह ललवंशी –
बोलासा (झाबुआ) – तारखेडी में कृत्रिम गर्भाधान केंद्र तीन वर्ष से बंद पड़ा, न ही कोई चिकित्सक यंहा आते है ओर भवन पुरी तरह जर्जर हो भी हो चुका है। उपयोगी सामग्री खराब हो चुकी है। केंद्र अंतर्गत क्षेत्र की दो ग्राम पंचायत के छ: गांव आते हैं। यहाँ हजारो की संख्या में गाय,भेस, बकरी, मुर्गीया पालन किया जाता है। आमतौर पर बारिश के कारण क्षेत्रों कई बीमारियों होती रहती है बीमारी से आये दिन मुह पका, खुर पका से पशु मर जाते हैं पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए तारखेडी में कृत्रिम गर्भाधान केंद्र खोल जाना चाहिए।

इस संबंध में ग्रामीणों ने जिले के पशुपालन विभाग को एक पत्र भेजा। जिसमें उल्लेख है कि क्षेत्र के पशुपालकों को पशुओं के गर्भाधान, बीमारी इलाज के लिए बोलासा, झकनावदा जाना पड़ता है। चूंकि बोलासा झकनावदा यहां से सात किलोमीटर दूर हैं, वहीं रास्ता में मधु कन्या नदी को पार कर के जाना पडता है पुरा कच्चा पुरा जंगल क्षेत्र है। इसलिए पशुपालकों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है। उन्होंने मांग की है कि पशुपालकों की परेशानी को देखते हुए गांव में ही कृत्रिम गर्भाधान केंद्र पुन प्रारम्भ किया जाए। जिससे ग्राम पंचायत तारखेडी, मोहकमपुरा, जुनापानी के साथ-साथ आसपास के गांव के ग्रामीणों को इसकी सुविधा मिल सके।
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क्षेत्र में आपातकाल में निजी चिकित्सक कभी आते जो गरीब लोग पशुओं इलाज शुल्क नहीं दे पाते हैं – पशुपालक,अमृत लाल लोधा।
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क्षेत्र में इलाज न होने के कारण दुधारू पशु की मौत होती है विभाग द्वारा आज तक किसी पशुपालन बीमा न मिला – पशुपालक, गंगाराम मंगरोलिया।
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मेरे द्वारा समुह से लोन लेकर भैंस खरीदीं थी बीमारी के कारण मोत हो चुकी है, गांव में आज तक खुरपका बीमारी के टिके नहीं लगे हैं – मोहन पिता शोभाराम, पशु पालक।
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रिक्त पद है जिसकी जानकारी जिला अधिकारी को लिखित में सुचित किया गया है – पशु चिकित्साधिकारी पेटलावद डॉ रामलाल गणावा।