प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत ग्रामीणों को नही मिल रही समय पर किश्त, गरीब परिवार अपना घर तोड़कर झोपड़ी में रहने को मजबूर, जिम्मेदार लगवा रहे चक्कर –

प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत ग्रामीणों को नही मिल रही समय पर किश्त, गरीब परिवार अपना घर तोड़कर झोपड़ी में रहने को मजबूर, जिम्मेदार लगवा रहे चक्कर –

News@- कुँवर शान ठाकुर/राज मेड़ा –
पंथबोराली (झाबुआ) – सरकार की कल्याणकारी ”प्रधानमंत्री आवास योजना” के तहत जिले की कई ग्राम पंचायतों में आज भी ग्रामीणों को लाभ नही मिल पाया है। आज भी कई लोग पंचायतों एवं अधिकारियो के चक्कर काट रहे है। किंतु उन्हें मिलने वाला लाभ नही मिल पा रहा है। कई ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण हेतु गरीब परिवारों को किस्त के माध्यम से पैसा तो मिला है लेकिन अधूरी किस्तों में। अधूरी किस्तों के चलते ग्रामीणों को बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। क्यो की गरीब परिवारों के द्वारा किस्तों की उम्मीद के चलते अपने कच्चे पुराने घरों को तोड़ दिया जाता है, लेकिन समय पर उन्हें क़िस्त नही मिलने उन्हें झोपड़ियां बनाकर निवास करना पड़ता है।

ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत टेमरिया में सामने आया है। जंहा ग्राम पंथबोराली निवासी पूना तोलिया गामड़ को प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास स्वीकृत हुआ था। आवास स्वीकृत होने के साथ ही पूना ने अपने घर का निर्माण पहली किस्त के साथ शुरू करवा दिया। और खुद अपने परिवार के साथ झोपड़ी में रहने लगा। पूना को पहले तो समय पर क़िस्त मिली लेकिन आधा घर बन जाने के बाद अब तक कई माह गुजर गए है उसे तीसरी क़िस्त के लिए पंचायत के चक्कर पर चक्कर काटने पड रहे है। पूना के अनुसार बारिश में उसके परिवार को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। उसके पास छत भी नही है कि वह अपने परिवार को बारिश से बचा सके। क़िस्त से मिले पैसे से खरीदी हुई सीमेंट भी पानी मे खराब हो चुकी है। मुसीबतों की मार झेल रहे पूना ने पंचायत स्तर पर बार-बार अपनी पीड़ा बताते हुए जल्द क़िस्त डलवाने की मांग की किन्तु उसकी एक सुनवाई नही हुई, अब पूना ने रिपोर्टर्स पेज के माध्यम से जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि जल्द उसे उसके अधूरे पड़े घर को पूरा करने में मदद करे एवं जल्द क़िस्त डलवाई जाए। ताकि वह अपने घर को बना सके।

”मामले को लेकर पंचायत के रोजगार सहायक प्रताप गरवाल का कहना है कि हमारे द्वारा 1 माह पूर्व ही जिओ टैग कर दिया गया, जनपद स्तर से पैसा रुका हुआ।”