परफारमेंस ग्रांड 14 वित्त आयोग अंतर्गत 8 करोड़ की राशि में घोटाला, कलेक्टर ने जांच के लिए गठित किए जांच दल, 7 दिवस के अंदर देनी होगी रिपोर्ट, झाबुआ जिले की तर्ज पर मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी आरटीआई के माध्यम से हुआ खुलासा –

परफारमेंस ग्रांड 14 वित्त आयोग अंतर्गत 8 करोड़ की राशि में घोटाला, कलेक्टर ने जांच के लिए गठित किए जांच दल, 7 दिवस के अंदर देनी होगी रिपोर्ट, झाबुआ जिले की तर्ज पर मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी आरटीआई के माध्यम से हुआ खुलासा –

News@- दिलीप मालवीय
झाबुआ – 75 पंचायतों में 14वें वित्त आयोग अंतर्गत कराधान फंड की भेजी गई राशि, 38 में से 7 पंचायतों को छोड़कर किसी ने नहीं लगाया था कर। ग्राम पंचायतों में आई परफारमेंस ग्रांट 14 वित्त आयोग अंतर्गत राशि का जमकर दुरूपयोग जीला पंचायत रीवा की जनपद पंचायत गंगेव की 38 ग्राम पंचायतें सुर्खियों में हैं। यह राशि 75 ग्राम पंचायतों को जारी हुई है। उक्त राशि उस योजना के तहत हे जिसमें ग्राम पंचायतें कर लगाकर जनता से टैक्स वसूल करने के बाद में परफॉर्मेंस के आधार पर ही उक्त योजना की राशि को जिला पंचायत के अनुमोदन के आधार पर ग्राम पंचायतों की शत प्रतिशत कार्यों की परफॉर्मेंस देखकर ही दी जाती है उसी कर वसूली के तहत कराधान फंड के तहत ग्राम विकास के लिए राशि जारी की गई है। जिसमें खेल हो गया। जानकारी मिली है कि ग्राम पंचायतें फर्जी तरीके से इस राशि का आहरण करने के लिए राशि प्राप्त करने के लिए भोपाल में कुछ अधिकारियों से ताल-मेल बनाकर अपने-अपने खातों में लाखों की राशि एक ही दिन में डलवाई गई। ग्राम पंचायतों के खाते में जैसे ही पैसा आया 8 करोड़ का आहरण भी एक वेण्डर के यहां से हो गया। यह वेण्डर जनपद पंचायत गंगेव का लिपिक था। उसी ने साठ-गांठ कर सारा खेल किया। फिलहाल उसे गंगेव से हटा दिया गया है। 8 करोड़ के इस घपले की खबर राज्य पंचायत संचालनालय भोपाल तक पहुंची। शिकायतें भी हुई। कांग्रेस नेता संजय पाण्डेय ने इसकी सबसे ज्यादा शिकायत की। कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने आज इस घोटाले की जांच के लिए एक दल गठित किया है, जिसमें जनपद पंचायत के सीईओ, खण्ड विकास अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी, पंचायत समन्वयक अधिकारी, सहायक यंत्री, उपयंत्री भी शामिल हैं। कलेक्टर ने अपने आदेश में लिखा है कि पंचायतराज संचालनालय के पत्र के तहत 4 सितम्बर 2019 द्वारा ग्राम पंचायतों को 14वें वित्त परफार्मेंस ग्रांट वर्ष 2017-18 हेतु जिले के 75 ग्राम पंचायतों में 28 अगस्त 2019 को सीधे एकल खाते में राशि जारी की गई है। यह संज्ञान में आया है कि बिना कार्य कराए एक ही फर्म को भुगतान राशि जारी की गई है। उक्त राशि से किए गए भुगतान से कराए गए कार्यों का सत्यापन गठित दल द्वारा किया जाएगा। बताया गया है कि 38 में 7 पंचायतों को छोड़कर किसी भी ग्राम पंचायतों ने करारोपण नहीं किया था सिर्फ फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।

कराधान की राशि किन मदों से वसूली गई, दस्तावेज देखेंगे –
जानकारी के मुताबिक कराधान फंड लेने के लिए ग्राम पंचायतों ने आनन-फानन में कर लगाकर वसूली का रिकार्ड तैयार कर लिया। उसी रिकार्ड के तहत ऊपर लेन-देन कर आनन-फानन में कराधान फंड की राशि ले ली गई। जैसे ही यह राशि पंचायतों के खातों में आई। एक वेण्डर के माध्यम से बिना किसी प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति के 8 करोड़ का आहरण किया गया। इसका खुलासा पंचायत दर्पण से हुआ। कलेक्टर ने अपने आदेश में लिखा है कि गठित दल 7 दिवस तक उक्त ग्राम पंचायतों का भ्रमण कर पात्रता परीक्षण करते हुए प्रतिवेदन में यह अवगत कराएगा कि उक्त पंचायतों में कराधान की राशि किन मदों से वसूल की गई। तथा वसूली का क्या दस्तावेजीकरण/संधारण किया गया। किन विशेष प्रयासों से उक्त राशि प्राप्त हो सकी ताकि अन्य पंचायतों में भी उक्त राशि प्राप्त किए जाने हेतु प्रयास किया जा सके। प्रतिवेदन ग्राम पंचायतवार अपने स्पष्ट अभिमत के साथ मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को प्रस्तुत करेंगे। इसमें जनपद पंचायत गंगेव, हनुमना, जवा, रीवा, रायपुर कर्चुलियान, सिरमौर के सीईओ को भी दायित्व सौंपा गया है।

वेण्डर कोई सामग्री नहीं देते सिर्फ -20 प्रतिशत कमीशन लेते हैं –
रीवा जिले में जितने भी वेण्डर वर्तमान में हैं, और वे ग्राम पंचायतों की राशि के लिए वेण्डरशिप किए हुए हैं, उनके किसी के पास कोई सामग्री नहीं रहती है। एक छोटी सी दुकान में दो कम्प्यूटर रखकर के सारा खेल कर रहे हैं। बताया जाता है कि ये वेण्डर पंचायतों की आने वाली राशि से सीधे 20 प्रतिशत कमीशन काट लेते हैं। 80 प्रतिशत राशि वापस करते हैं। जो ग्राम पंचायतें काम करना नहीं चाहती हैं और सीधे पैसा हजम करने का इरादा बना रखा है, उनके लिए तो ठीक है लेकिन जिन ग्राम पंचायतों में काम हो रहे हैं, वहां के पैसे से 20 प्रतिशत की कटौती कर पैसा वापस करने से ग्राम पंचायतों में होने वाले कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। बताया गया है कि वेण्डरशिप पूरी तरह से धंधे के लिए खुले हुए हैं। उनके द्वारा कोई सामग्री ग्राम पंचायतों में नहीं पहुंचाई जाती। बताया जाता है कि ये वेण्डर अपने ही घर के 5-6 लोगों के नाम रजिस्ट्रेशन करवाकर वेण्डरशिप चलाते हैं। इनकम टैक्स की चोरी भी इनके द्वारा की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि गोपनीय तरीके से कई वेण्डरों की सूची भी तैयार की गई है जिनके द्वारा यह सब लेन-देन किया जा रहा है। उनके खिलाफ भी कार्यवाही संभावित है। ज्ञात रहे कि मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र झाबुआ सहित पूरे मध्यप्रदेश में पिछली बार 13 वित्त आयोग के स्व कराधान योजना अंतर्गत भी 600 से अधिक ग्राम पंचायतों में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ था एवं इसकी जांच भी लोकायुक्त एवं और ईओडब्ल्यू भोपाल कर रहा है फिर भी ग्राम पंचायतों की फर्जी सीए ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर यह राशि दोबारा उन्हीं ग्राम पंचायतों का डाली गई है जिन ग्राम पंचायतों की जिला पंचायत द्वारा जांच भी की जा चुकी है जिसको लेकर आपत्ति भी लगाई जा रही है। परफॉर्मेंस ग्रांट 14 वित्त आयोग के अंतर्गत मध्य प्रदेश की कुल 1148 ग्राम पंचायतों में 28 अगस्त को 300 करोड रुपए की राशि जारी की गई थी। पूर्व में रिपोर्टर्स पेज पर परफारमेंस ग्रांट योजना अंतर्गत 14 वित्त आयोग की राशि के बारे में फर्जी रिकार्डो के आधार पर राशि प्राप्त करने के लिए फर्जीवाड़े की शंका जाहिर की गई थी जिसमें पहला ही मामला रीवा जिले में पाया गया।