ग्रामीण कर रहे वर्षो पुरानी प्रथा का निर्वहन, पहली फसल चढ़ाकर ग्रामीणों ने आज भी किया किया नरवाई प्रथा का निर्वहन –

ग्रामीण कर रहे वर्षो पुरानी प्रथा का निर्वहन, पहली फसल चढ़ाकर ग्रामीणों ने आज भी किया किया नरवाई प्रथा का निर्वहन –

News@- राजेश राठौड़ –
रायपुरिया (झाबुआ) – ग्रामीण अंचलों में इस वर्ष की प्रथम फसल पकने पर पहले माता रानी को चढ़ाते हैं उसके बाद आदिवासी किसान ग्रहण करता है यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है आदिवासी भाई जिसे अपनी भाषा में जातर (नरवाई) कहते हैं जिस दिन गांव में जातर करना होती है उसके 1 दिन पहले कोटवाल से ढूंढी पिटवाई जाती है कि आप सभी लोगो को माता रानी के यहां पर चलना है सभी सदस्यो को पांच पांच भुट्टे लेकर आना है उस दिन गांव में किसानी कार्य बंद रहता है अगर कोई कार्य करता हुआ पाया जाता है तो पंच लोग उसे दंड देते हैं गांव के सागडिया के निवासी माँगीलाल वाखला ने बताया कि हमारी समाज में यह परंपरा पुराने बुजुर्ग लोग बता गए थे तब से हम यही करते आ रहे हैं जहां तक माता रानी के यहां फसल नहीं चढ़ाते वहां तक गांव का कोई भी सदस्य अपनी पकी हुई फसल नहीं खाता सुबह गांव में स्थानीय मंदिर पर हमारी परंपरा अनुसार पूजा पाठ करते हैं उसके बाद दोपहर में मां भद्रकाली के मंदिर पर पहुंचते हैं वहां पर माता रानी के चरणों मैं भुट्टे रखकर उससे कामना करते हैं की हमारे घर परिवार खेती-बाड़ी में खुशहाली लाना उसके बाद सभी भुट्टो की खीर बनाई जाती है व खीर का भोग लगाया जाता है पूजा पाठ की जाती है सभी गांव वाले एक साथ बैठकर माता रानी से कामना करते हैं कि हमारे परिवार में हमेशा कृपा बनाए रखना ढोल धमाके साथ वहां पर पूजा पाठ करते हैं महिलाएं अपनी भाषा में गीत गाती है ।प्रथा की एक खास विशेषता है कि आदिवासी किसान अपनी फसल पूरे गाँव से इक्कठा कर सांवलिया सेठ एवं रामदेवरा भगवान के समक्ष चढ़ाते है। और भगवान से आगामी वर्ष अच्छी फसल की कामना भी करते है।