1993 में मुस्लिम तुष्टिकरण की सरकार ने नमाज़ की दी इजाजत और माँ श्रृंगार गौरी के दर्शन पूजन पर लगा दी थी पाबंदी

माँ के पूजन के लिए इस शिवसैनिक ने 1995 से अबतक अपना कितना रक्त बहाया

शिवसेना के इस फायर ब्रांड नेता को कौन नही जानता। न्याय और सच का सामना करने के लिए अपने हठधर्मिता का इस्तेमाल करने के लिए प्रख्यात कहें या कुख्यात इस शिवसैनिक ने काशी में माता श्रृंगार गौरी के दर्शन पूजन की प्रथा को चालू करने के लिए न जाने अपने शरीर के लहू के कितने कतरे बलि के तौर पर दे दी। रिपोर्टर्स पेज से खास बातचीत में शिवसैनिक अरुण पाठक ने माता श्रृंगार गौरी के दर्शन पूजन को लेकर कुछ खास बातें साझा की।


फ़ाइल फोटो

“काशी विश्वनाथ मंदिर की सच्चाई, जो हर हिंदू को जरूर जाननी चाहिए”

माँ श्रृंगार गौरी का मंदिर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर व ज्ञानवापी मस्जिद के पीछे ईशान कोण में स्थित हैं। माता रानी का विग्रह ज्ञानवापी परिसर दीवार के ताखे में हैं। मान्यता है कि भगवान शिव काशी में बसने के बाद अपनी अर्धांगिनी गौरी को भी अपने साथ काशी लेकर आए थे। पौराणिक मान्यता के अनुसार मां श्रृंगार गौरी का स्वरूप जनश्रृति हैं जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चहूंओर अंधकार व्याप्त था तब माता ने अपने ‘ईषत’ हस्त से सृष्टि की रचना की थी।


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दर्शन मात्र से सुहागिनों को मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

शास्त्रों के अनुसार सुहागिन महिलाएं देवी श्रृंगार गौरी पूजा करती हैं और उन्हें श्रृंगार की सभी वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं क्योंकि देवी को श्रृंगार बहुत पसंद है। देवी को लाल चुनरी, लाल अड़हुल के फूल की माला, धूप, दीप, नैवध, नारियल, सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्रृंगार गौरी के दर्शन से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य, श्री समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है और उनका श्रृंगार सदा बना रहता है।


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बिना श्रृंगार गौरी के दर्शन किये नही मिलता बाबा के दर्शन का पूर्ण फल

श्रृंगार गौरी का दर्शन पूजन वर्ष भर में सिर्फ एक दिन, वह भी चैत्र के नवरात्र को चतुर्थी को ही होता है। आस्थावानों को माता श्रृंगार गौरी के दर्शन पूजन का वर्ष में यही एक बार अवसर प्राप्त होता है। आमतौर पर सामान्य दिनों में श्रृंगार गौरी को लाल वस्त्र से ढककर रखा जाता है। मां का यही विग्रह स्वयंभू है। परंतु 1993 से पहले ऐसा नहीं था क्योंकि 1993 मे बनी सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण की सरकार थी जिन्होंने एक वर्ग के लोगों को खुश करने के लिए उन्हें नमाज अदा करने की इजाजत दी परंतु हिंदुओं के माँ श्रृंगार गौरी के दर्शन पूजन पर पाबंदी लगा दी। श्रावण मास के महीने में विश्व के चहूं दिशाओं से हिंदू, काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन के लिए आते हैं परंतु दर्शन पूजन का पूर्ण फल प्राप्त किये बिना काशी से चले जाते हैं, क्योंकि हमारी पौराणिक मान्यता यह है कि जब तक माँ श्रृंगार गौरी का दर्शन नहीं किया जाएगा तब तक बाबा विश्वनाथ के दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।


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जान रह के क्या होगा जब धर्म ही न रहे

भक्तों के लिए माता श्रृंगार गौरी के दर्शन पूजन को दैनिक रूप से शुरू करने के अबतक न जाने कितने आंदोलन कर चुके अरुण पाठक प्रधानमंत्री मोदी ऑयर यूपी के मुखिया आदित्यनाथ योगी से निवेदन करते हैं कि श्रृंगार गौरी के दर्शन को भक्तों के लिए दैनिक निर्बाध रुप से खोल दिया जाय। ताकि दूर दराज से बाबा के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को माँ के दर्शन भी प्राप्त हो सकें।


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