अल्लाह की रहमतों और इबादत से भरा होता है रमजान महीना – मैनुद्दीन खान

अल्लाह की रहमतों और इबादत से भरा होता है रमजान महीना – मैनुद्दीन खान

News@- सत्यप्रकाश तिवारी –
देवरिया (यूपी) – रमजान का पाक महीना अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। आज यानी शुक्रवार को देश भर में रमजान के आखिरी जुमे की नमाज पढ़ी गयी। इसके लिए रोजेदारों ने सुबह से ही तैयारियां शुरू कर दी थी और मस्जिदों को सजाया भी गया था। हर साल रमजान का इंतजार रोजदारों को रहता है। ऐसा माना जाता है कि रमजान के आखिरी जुमे की नमाज को अदा करने से दुआएं कबूल होती हैं, खुदा रोजेदारों पर रहमतों की बारिश करता है, लोगों में प्यार और भाईचारा बढ़ता है।

देवरिया बुधु खां के लोक प्रिय समाजसेवी व जामिया अरबिया मिराजुल उलूम मदरसे  के नाजिम मैनुद्दीन खान ने बताया कि  इस्लाम धर्म का पवित्र महीना रमजान  मई में शुरू हो जाता है। इस पाक महीने में 30 रोजे रखे जाते हैं. रमजान का महीना अल्लाह की रहमतों और इबादत से भरा होता है. साफ दिल से रोजा रखने पर अल्लाह उनकी सारी ख्वाहिशें पूरी करते हैं. मई के पहले हफ्ते में चांद दिखने के बाद ही रमजान के पाक महीने की शुरुआत हो जाती है।

रमजान के पूरे महीने अल्लाह की इबादत की जाती है. रोजा रखने से पहले सुबह उठकर सहरी की जाती है और दिन भर रोजा रखा जाता है. दिन भर रोजा रखने के बाद शाम को मगरिब की अजान के साथ  इफ्तारी की जाती है. रमजान में  कुराने-ए पाक की तिलावत भी की जाती है।

मैनुद्दीन खान ने बताया इस महीने में जकात देने का बहुत बड़ा महत्त्व है रमजान में दान करने से सवाब मिलता है और घर में बरक्कत होती है जकात इस्लाम धर्म के पांच स्तंभों कलमा, नमाज, जकात, रोजा और हज में से एक है. हर मुस्लिम को अपनी आय से कुछ हिसा दान करना होता है।

इस पाक महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है मैनुद्दीन खान – मैनुद्दीन खान ने बताया कि शुरुआत के 10 रोजे में खुदा की रहमत बरसती है दूसरे 10 रोजे को मगफिरत के रोजे कहे जाते हैं इन दस दिनों में मुस्लिम समुदाय के लोग खुदा से अपनी गलतियों की माफी मांगते हैं और आखिरी वक्त में जन्नत मिलने की दुआ मांगते हैं आखिर के बचे हुए रोजे में अल्लाह से जहन्नुम की आग से बचने की दुआ मांगते हैं 30 रोजे की रात चांद दिखाई देने के दूसरे दिन ईद ( ईद उल फितर ) मनाई जाती है।

क्या है अलविदा रमजान- मैनुद्दीन खान ने बताया रमजान के महीने में जुमे की चार नमाजें पढ़ी जाती हैं यानी कि इस पाक महीने में चार शुक्रवार होते हैं, हर शुक्रवार के दिन जुमे की नमाज होती है। रमजान में आखिरी जुमे के दिन नमाज पढ़ा जाता है, उसके बाद ही माना जाता है कि अब रमजान माह खत्म होने वाला है। आखिरी जुमे की नमाज से अलविदा रमजान होता है।

जुमे की नमाज की महत्व – हर शुक्रवार के दिन होने वाली नमाज को जुमे की नमाज कहा जाता है। ऐसा मानना है कि खुदा ने शुक्रवार के दिन ही इंसानों को बनाया था, इस दिन खुदा की बंदगी कर उसे शुक्रिया करने और उससे दुआएं लेने का रिवाज है। ऐसी मान्यता है कि जुमे के दिन पाक मन से नमाज पढ़ने से खुदा खुश होकर लोगों की मन्नतें पूरी करता है, इसलिए रमजान के पाक माह में जुमे की नमाज में हर कोई शामिल होना चाहता है।