मनरेगा में काम कर रहे हैं बाल मजदूर, गरीबों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं प्रधान

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मनरेगा में काम कर रहे हैं बाल मजदूर, गरीबों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं प्रधान

 

हम बात कर रहें हैं बस्ती जिला के गौर ब्लाक के छेत्र ग्राम सभा मझौवा दूधनाथ के प्रधान की जिन्होंने नाबालिग बच्चों से मनरेगा में काम कराया जहाँ एक तरफ केंद्र सरकार और राज्य सरकार लोगों से कहतें हैं कि बालश्रम कानूनन अपराध है यह नहीं होना चाहिए वहीं बस्ती जिला में एक ग्राम सभा में ऐसा मामला सामने आया है जहाँ पर ग्राम प्रधान ने बालश्रम के कानून की अवहेलना करते हुए छोटे-छोटे नाबालिक बच्चों से मनरेगा में काम कराया। क्या देश में कानून अपनी अवहेलना कराने मात्र के लिए बनाया गया है।

जो बच्चे इस तरीके से बाल मजदूरी कर रहे हैं यह उनके परिवार की लाचारी कहें या मजबूरी ? परिवार की लाचारी , बेरोजगारी , भुखमरी और असहाय होने की वजह से इसका फायदा समाज के कुछ ऊपर तबके के लोग उठा रहे हैं और यह बहुत ही गहन मुद्दा है , जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।
जब सरकार इतनी मुहिम चला रही है तो सरकार को ग्राउंड जीरो पर भी ध्यान देना चाहिए और जमीनी स्तर पर जो कार्य हो रहे हैं चाहे वह ग्राम प्रधान के अधीन ही क्यों ना हो उस पर भी ध्यान देना चाहिए। कागज पर किसी और का नाम  , और भत्ता किसी और के नाम , इसके बावजूद बच्चों से काम कराया जा रहा है। ताज्जुब की बात तो यह है कि इसका लेखा जोखा सरकार के पास भी नहीं है , और शायद इसी कारण सरकार के द्वारा जमीनी स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।

रिपोर्ट : कृष्ण मणि कुमार तिवारी 

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