विवेकानन्द यौवन के सदुपयोग का प्रतिमान हैं

COUNTRY STATE VARANASI

वाराणसी : स्वामी विवेकानंद की जयन्ति और “राष्ट्रिय युवा दिवस” के अवसर “हम भारत हैं अभियान” के संचालक और स्वच्छ भारत मिशन के दूत साकिब भारत के नेतृत्व में अनेक मुस्लिम युवकों ने नदेसर स्थित विवेकानन्द की प्रतिमा के समक्ष मोमबत्तियां जला कर स्वामी जी और उनके विचारों जे प्रति सम्मान प्रदर्शन किया। इस अवसर पर अपना सम्भाषण करते हुए साकिब भारत ने कहा कि विवेकानन्द यौवन के सदुपयोग का प्रतिमान हैं , मात्र उन्तालीस वर्ष् के अल्पकालीन जीवन में उन्होंने जिस प्रकार मानव के वास्तविक विकाश और विश्वबन्धुत्व पर जो कार्य किया वह इतिहास में विरल है । विवेकानंद वैशिवक पटल पर “उपेक्षित भारत” का पहला गर्वित उद्घोष हैं वो गुलाम-भारत के सर ऊँचा करने का पहला दृश्य हैं । विवेकानन्द ने भारत को वृद्ध से युवा होने का संदेश दिया और उपनिषद की बोली में कहा कि जागो, उठो, और बढ़ो अपने लक्ष्य की ओर । उन्होंने यह भी समझाया कि केवल किताबी शिक्षा से मनुष्यता समृद्ध नही होगी उसे क्रियाशील और वर्तमान से जुडी शिक्षा चाहिए, उसे खेल कूद और मैत्री चाहिए ।

वो मैकाले की नौकरी दिलाऊ शिक्षा के विरोधी थे और इसे निम्न मानते थे उनके लिए शिक्षा का अर्थ जीवन और परमात्मा की समझ में निहित था और वो मानते थे की स्वतंत्र भारत को मुस्लिम देह और वैदिक आत्मा ही पुष्ट बनाएगी वास्तव में वह चिर युवा थे। साथ ही साक़िब भारत ने कहा की विवेकानन्द ने हमे सिखाया है कि किसी भी मज़हब से पहले मानवता और किसी भी समुदाय से आगे भारत होना चाहिए और हम उसी मार्ग पर चल रहे हैं ।

कार्यक्रम में शाहीद अंसारी,जुनैद, अफ़सर,मुज़म्मिल,हिमांशु सिंह समेत अनेक बालक व युवा हिन्दू मुस्लिम के साथ हुई इस सम्मान सभा को एकता के सन्देश की तरह भी देखा जा सकता है ।

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